कैसे तेरा हिज्र लिखूं
----------------------------------
(लक्ष्य “अंदाज़”)
शहरे वफ़ा की फिजाओं का रंगीन सलाम लिखूं
II
आजा कि इन हवाओं पर तेरा रेशमी नाम लिखूं II
तेरी मुहब्बतों में डूबकर शहरों शहर भटका मगर ,
इक रात नशे की ऐसी दे मैं आँखों के जाम लिखूं II
यहाँ बदलियों के आइने तेरी मुसलसल तस्वीरें हैं ,
मैं आसमां में उड गया इन्हें चूम लूँ पयाम लिखूं II
जंगलों की बारिशों में भीग कर मैं ये ही सोचता ,
तेरे लबों की नमी को सहर लिखूं या शाम लिखूं II
तुझे ज़र्फ़ पे यकीन है मुझे हादिसों का खौफ है ,
तेरे मिलने की इबादतें किस खुदा के नाम लिखूं II
तेरे शहर के इक अदीब ने कई बार मुझे ये कहा ,
तुझे भूलकर जिंदा रहूँ तुझे याद कर कलाम लिखूं II
ये कहानियों सी बात है तू आज तक मेरे साथ है ,
मैं कैसे तेरा हिज्र लिखूं मैं कैसे वफ़ा नाकाम लिखूं II
©2015
“ANDAZ-E-BYAAN” Dr.LK SHARMA

